A travel blog with emphasis on Art & Culture

$type=slider$snippet=hide$cate=0

अपने जैसा बना लेने का शौक़ भी बिगड़ते रिश्तों का कारण

SHARE:

आप के सामने अमन का पैग़ाम एक बार फिर से हाज़िर है. अमन का पैग़ाम का मकसद समाज की उन कमियों  को सामने लाना है, जिनके कारण एक इंसान दूसरे इंस...

आप के सामने अमन का पैग़ाम एक बार फिर से हाज़िर है. अमन का पैग़ाम का मकसद समाज की उन कमियों  को सामने लाना है, जिनके कारण एक इंसान दूसरे इंसान के करीब नहीं जा पाता. अक्सर मुझसे सवाल किया करते हैं आप का धर्मों के बारे मैं क्या नजरिया है? चलिए आज दो चार शब्द इस विषय पे पहले कह देता हूँ  “ मैं किसी दुसरे के धर्म की कमियां या बुराइयां निकालने के खिलाफ हमेशा रहा क्यों की यही बात दो इंसानों के दिलों मैं दूरियां बढाती हैं. जब भी मैं किसी से मिलता हूँ तो हिन्दू, मुसलमान या ईसाई से नहीं मिलता बल्कि अपने जैसे एक इंसान से मिलता हूँ. नफरत को प्रेम से ख़त्म करने मैं विश्वास रखता हूँ. नफरत के बदले नफरत का नतीजा हमेशा अशांति ही हुआ करता है.धर्म इंसान का जाती मसला है और परमात्मा ने हर एक को अक्ल  भी दी है, की उसे क्या खाना है, कहां रहना है और कौन सा धर्म मानना है. इसमें कोई  ज़बरदस्ती मुमकिन नहीं और अगर ज़बरदस्ती की जाए तो अंजाम नफरत ही हुआ करता है.   किसी व्यक्ति विशेष से मैं दूरी नहीं रखता क्योंकि दूरी किसी की बुराईयों  से  रखी जाती है, किसी व्यक्ति विशेष से नहीं. मैं  हज़रत अली (ए.स) की इस  बात पे अमल किया करता हूँ की " यह ना देखो कौन कह रहा है, बल्कि यह देखो की क्या कह रहा है.मैं मुसलमान हूँ इसलिए इस्लाम का सहारा लेता हूँ शांति सदेश देने के लिए यदि मैं किसी और धर्म को मानने वाला होता तो उसका सहारा ले रहा  होता , लेकिन देता यही शांति सन्देश. कुछ लेख मुझे ऐसे मिले हैं जिसमें लिखने वाले ने यह ध्यान मैं रेख के लिखा है, की वोह एक मुसलमान को भेज रहे हैं. मेरा निवेदन है ऐसा न करें.लेख़ सत्य पे आधारित हो और उसका मकसद समाज मैं अमन और शांति काएम करना हो.. अमन का पैग़ाम एक निष्पछ ब्लॉग है क्योंकि  पछ्पात कभी समाज मैं शांति काएम नहीं कर सकता. अमन के पैग़ाम पे हर इंसान को आज़ादी है की अपने दिल की बात इमानदारी से रखे और यदि कोई भी शक हो, कोई भी ग़लत पैग़ाम दिखाई दे , ग़लत टिप्पणी मिले तुरंत वहीं पे अपनी बात रख दें.  इस से हमें अपने इस अमन के पैग़ाम को और प्रभावशाली बनाने मैं सहायता मिलेगी, जिसका फाएदा पूरे समाज को होगा.

हमारी सबसे बड़ी ग़लती यह है की हम इस समाज मैं जिस से मिलते हैं उसको अपने जैसा बना लेना चाहते हैं और जो अपने जैसा ना बन सके या बनने से इनकार करदे , उसको  हम पसंद नहीं करते . हमारी यह भी आदत  है की जिसको हम पसंद नहीं करते उसके बारे मैं वोह बुराइयां भी समाज मैं फैला दिया करते हैं जो उसमें नहीं मोजूद हुआ करती और इसका  नतीजा दूरियां , नफरत, झगडे की सिवाए कुछ नहीं हुआ करता.

इस अपने जैसा बना लेने का शौक़ अक्सर हमको ऐसे दोस्त देता है जो वफादार नहीं होते और बाद मैं उस दोस्त को उसके धर्म को बुरा भला कहने लगते हैं. इस अपने जैसा बना लेने का शौक़ अक्सर हमें अक्सर बेवफा  पत्नियाँ या  पति भी दे दिया करता है और बाद मैं हम पछताते हैं.


सच्चा इंसान वही है जो अपने व्यक्तित्व से पहचाना जाए. हम जब भी किसी इंसान से मिलते हैं तो उसको खुश करने के लिए उसके जैसे बनने का नाटक करने लगते हैं जो बहुत दिनों तक चल भी नहीं पाता और नतीजा कुछ दिन की मुहब्बत के बाद दूरियां हुआ करती हैं. ऐसा इंसान जो आप से मिलने पे आप जैसा बनने की कोशिश करे, आप की हर एक बात से उनकी  सहमती होने लगे कभी आप के प्रति वफादार नहीं हो सकता.
अक्सर नौजवान लड़के और लडकियां  जब एक दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं, इस सत्य को झुठलाते हुए की कोई दो मनुष्य एक जैसे हो ही नहीं सकते , यह दिखाने की कोशिश करने लगते हैं की एक दोनों की पसंद एक है, दोनों की सोंच एक है इत्यादि इत्यादि और शादी के बाद जब एक दूसरे  की सही पसंद , सही सोंच का पाता  लगता है तो झूट और धोका देने के इलज़ाम के साथ दूरियां बढ़ना शुरू हो जाती हैं. झूट, फरेब के बीज बो के  वफादार वर-वधू की तलाश , का नतीजा तलाक के सिवाए कुछ नहीं हुआ करता है.

इसी प्रकार धर्म का भी मसला है. हम जब दूसरे धर्म वाले व्यक्ति से मिलते हैं तो हम ऐसा ज़ाहिर करते हैं जैसे उसके धर्म की सभी बातें हम भी मानते हैं और नतीजे  मैं एक नया मज़हब पैदा करने की कोशिश  करते हैं. हम भी ऐसे  व्यक्ति से ही खुश रहते हैं और कहते हैं देखो कितना अच्छा इंसान है, हमारे धर्म की बातों को भी मानता है. लेकिन ऐसे  रिश्ते बहुत दिन नहीं चला करते क्योंकि यह  फरेब  के सिवाए कुछ नहीं.. एक मुसलमान महिला पर्दा इसलिए नहीं करती  क्योंकि उसकी सहेली जो ग़ैर मुस्लिम है उसको पसंद नहीं, जबकि उसका धर्म कहता है पर्दा ग़ैर मर्द से करो . ऐसे ही एक शाकाहारी केवल इसलिए मांसाहारी बन जाता है क्योंकि उसके दोस्त मुसलमान हैं और उनके साथ रहना है. यह दोनों तरह के इंसान काबिल ए भरोसा नहीं हुआ करते. जो अपने धर्म का वफादार ना  हुआ वोह आपका या हमारा वफादार   क्या होगा?


हम हर इंसान को अपने ही धर्म पे क्यों देखना चाहते हैं? यह बात मेरी समझ मैं नहीं आत़ी? क्योंकि जब मजिल एक ही है, केवल रास्तों का फर्क है तो झगड़ा किस बात का? अपने धर्म के प्रति वफादार  रहो और दूसरों के धर्म की इज्ज़त करो यही शांति का रास्ता है.यह बात हमें नहीं भूलना चाहिए की पूरे विश्व में इंसानों का शोषण धर्मों के अंतर का फाएदा  उठाते हुए कुछ  चतुर लोगों द्वारा  जनसाधारण को  गुमराह और कई बार  आतंकित करके उनपर अपने मनोवैज्ञानिक शासन स्थापित करके हमेशा किया जाता रहा है. विश्व के सभी अभावग्रस्त लोग धर्मान्धता के कारण ही आज भी पिछड़े हैं और चतुर लोगों के चंगुल में शोषण के शिकार हो रहे हैं और इस्तेमाल हो रहे.



जिनलोगों का लेख़ “अमन के पैग़ाम” पे पेश हो चुका है या नए साल तक पेश होगा, उनका नाम  नए साल की पोस्ट मैं शामिल किया जाएगा और उस शांति सन्देश को कई अख़बारों मैं प्रकाशित करने की कोशिश भी की जाएगी. जिनके लेख़ अभी तक नहीं आए हैं वोह जल्द से जल्द अपने लेख़ , कविता , या ३-४ लाइन मैं शांति सन्देश भेज दें..FOLLOW करना न भूलें , वहीं से चित्र पेश किये जाएंगे.  धन्यवाद् ..एस एम् मासूम  

COMMENTS

BLOGGER: 22
Loading...
नाम

#amankapaigham,4,#avinash vachaspati,1,2020 alwida,1,२७ रजब,2,अंजना (गुडिया),1,अंधविश्वासी,1,अख्तर खान अकेला,1,अजय कुमार झा,1,अजादारी,2,अनवर जमाल,1,अनैतिक,3,अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस,1,अपर्णा त्रिपाठी "पलाश",1,अमन और शांति,2,अमन का पैगाम,66,अमित शर्मा,1,अयातुल्लाह सीस्तानी,1,अरुण चन्द्र रॉय,1,अलबेला खत्री,1,अश्लीलता,3,असंतुलन,4,अहलिबैत अलैहिमुस्सलाम,1,आंतिरक इच्छाओं,1,इंसान,1,इंसानियत,17,इमाम अली (अ.स),2,इमाम हुसैन,2,इस्मत जैदी,1,इस्लाम,16,ई रिक्शा,1,ईस्लाम छोडो आज़ादी कि राह मदद का वादा,1,एस एम् मासूम,2,एस.एम.मासूम,4,एहसान फरामोशी,7,ऑनर किलिंग,1,ओबामा,1,ओल्ड,1,कट्टरवादी,1,कर्बला,2,कविओं,1,कविता,2,कश्मीरी चाय,1,काबा और कर्बला,1,कुरान,6,कुरीतियों,1,कुसुमेश,1,केवल राम,1,कोरोना,1,कौटुम्बिक व्यभिचार,1,खुशदीप सहगल,1,गाँधी,1,गिरिजेश कुमार,1,गुलाब,1,चाय का मज़ा,1,जागरूकता,1,जिन्न,1,जिहाद,6,जौनपुर,6,डा. रूपचन्द्र शाश्त्री “मयंक”,1,डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट,1,डॉ टी एस दराल,1,तारकेश्वर गिरी,1,दरिंदगी,1,दानिश" भारती,1,दीप पाण्डेय (विचार शून्य),1,देश भक्ति,4,दोषारोपण,2,दोहरे चरित्र,1,धर्म और राजनीति,1,धर्मदर्शन,1,धर्मपत्नी,1,धार्मिक,1,नरेन्द्र मोदी,1,नाईट क्लब,1,निर्मला कपिला,1,पकोड़ा,1,पड़ोसी,1,पत्नी से मित्रता,1,परिवार,1,पवन कुमार मिश्र,1,पश्चिमी सभ्यता,1,पूजा शर्मा,1,पेंशन,1,पेंशन एक इस्लामी मशविरा,1,पॉलिटिक्स,1,पोर्न,2,फतवे,2,फ़ातिमा,2,फेसबुक,1,फ्रांस,1,बडबोले,4,बलात्कार,2,बाप,1,बुराईयों,1,बुर्का,1,बुर्क़े,1,बेअसत,1,बेशर्मी मोर्चा,1,बॉय फ्रेंड,1,ब्रिटेन,1,ब्लॉगजगत,1,ब्लॉगर,2,ब्लोग्गेर्स की दुनिया,9,भारतीय संस्कृति,6,भ्रष्ट,1,भ्रष्टाचार,2,भ्रष्टाचार अन्धविश्वासो,1,मस्तिष्क,1,महिला अधिकार,1,महिला जगत,15,माँ,6,मानसिक विकृतियों,1,मीनाक्षी पन्त,1,मुंबई,1,मुकेश कुमार सिन्हा,1,मुफज्ज़रनगर,1,मुसलमान,1,मुहर्रम,5,मैं एक मुस्लमान हूँ ?,1,मैथली शरण गुप्त,1,यौन आकर्षण,1,यौन हिंसा,1,रचना बजाज,1,रज़िया राज़,1,रश्मि प्रभा,1,राजनीति,3,राजनीती,5,राजेन्द्र स्वर्णकार,1,रिश्ते नाते,1,रेखा श्रीवास्तव,1,लता हया,1,लविंग जिहाद,1,लालकृष्ण आडवाणी,1,लिव-इन-रिलेशनशिप,1,वंदे मातरम्,1,वंशावली,1,वहम,2,विकास,1,विवाह,2,विवेक रस्तोगी,1,वीणा श्रीवास्तव,1,वेबपोर्टल,1,शक,2,शक या वहम,6,शराब. ब्लू फिल्म,1,शादी या लिवइन रिलेशनशिप,1,शाहनवाज़ सिद्दीकी,1,शिखा वार्ष्णेय,1,शिशु,1,शेयर मार्केट,3,संगीता पुरी,1,संजय भास्कर,1,संपादकीय,7,संस्कार,1,सतीश सक्सेना,1,सदाचार,16,समलैंगिक,1,समस्याएं,1,समाज,9,समाज के दो चेहरे,18,समीर लाल ’समीर,1,सहिफा इ सज्जडिया,2,सामाजिक प्राणी,1,सामाजिक भय,1,सामाजिक मुद्दे,1,साम्‍प्रदायि‍क सद् भाव,1,सास ससुर,1,सिविल डिसओबिडियेन्स,1,सेक्स,2,सेक्स एजुकेशन,1,स्वस्थतम की उत्तरजीविता,1,हज़रत अली,1,हरकीरत हीर,1,हरदीप राणा जी,1,हिंदी ब्लॉग जगत,1,हिजाब,2,हिन्दू,1,aman,2,amankapaigham,103,arvind vidrohi,2,Asia,1,asl islam,2,blog,4,blog jagat,26,blogger,10,bloggers,11,bold,1,Civil disobedience,1,culture,22,current affairs,4,Death,1,Dipawali,1,Diwali,1,dosti,2,dua,1,e richshaw,1,Editorial,195,facebook,4,fathers day,1,featured,21,festival,3,festivals,1,Hadith,1,headline,17,Hindi,5,Hindu,1,history,1,HIV/AIDS,1,http://blogsinmedia.com,1,India,6,jinn,1,Kashi naresh,1,love marriage,2,Maharashtra,2,mahila jagat,33,Mantra,1,Mumbai,2,Opposing Views,3,parents,2,peace message,59,photo,2,politics,23,porn,2,portfolio,3,Race chart,1,Religion and Spirituality,60,rizq,1,rose,1,s.m.masoom,7,S.M.MASUM,4,samaj,2,shajra,1,shajra sadat,1,Shirdi,1,slut march,1,social issues,52,social media,1,society,56,sport,1,talents,1,tea time,1,Teachings,22,The News International,2,vandana gupta,1,Varanasi,1,wikileaks,1,women issues,3,world,1,world issues,4,yoga,1,zeeshan zaidi,1,
ltr
item
S.M.MAsoom: अपने जैसा बना लेने का शौक़ भी बिगड़ते रिश्तों का कारण
अपने जैसा बना लेने का शौक़ भी बिगड़ते रिश्तों का कारण
http://3.bp.blogspot.com/_GGCW34kikAU/TQw6eksQpRI/AAAAAAAAAFA/Kxl5Gh1wHvc/s200/unity.jpg
http://3.bp.blogspot.com/_GGCW34kikAU/TQw6eksQpRI/AAAAAAAAAFA/Kxl5Gh1wHvc/s72-c/unity.jpg
S.M.MAsoom
https://www.smmasoom.com/2010/12/blog-post_17.html
https://www.smmasoom.com/
https://www.smmasoom.com/
https://www.smmasoom.com/2010/12/blog-post_17.html
true
8797138421869493963
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy